कैसे होगा कलयुग में सतयुग


वर्तमान में सन् 1997 से 3000 ईशवी तक पुनः सत्ययुग जैसा वातावरण, आपसी प्रेम
का माहौल बनेगा। फिर से फलदार वृक्ष तथा छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे। फैक्ट्रियां धुँआ
रहित होंगी। फिर बंद हो जाऐंगी। लोग हाथ से बने कपड़े पहनेंगे। मिट्टी या स्टील के बर्तन
प्रयोग करेंगे जो छोटे कारखानों में मानव चालित यंत्रों से तैयार होंगे जो मानव संचालित
अहरण की तरह चलेंगे। पशुधन बढ़ेगा। सब मानव मिलकर पूरी पृथ्वी को उपजाऊ बनाने ें एकजुट होकर कार्य करेंगे। कोई धनी व्यक्ति अहंकारी नहीं होगा। वह अधिक धन दान
में देगा। जो अधिक धन संग्रह करेगा, उसे मूर्ख कहा जाएगा। उसको ज्ञान समझाकर
सामान्य जीवन जीने की प्रेरणा दी जाएगी जिसको वह स्वीकार करेगा। सामान्य जीवन जीने
वाले और भक्ति, दान धर्म करने वालों की प्रशंसा हुआ करेगी। पश्चिमी देशों (अमेरिका,
इंग्लैंड आदि-आदि) वाली सभ्यता समाप्त हो जाएगी। स्त्राी-पुरूष पूरे वस्त्रा पहना करेंगे।
सुखमय जीवन जीएंगे। एक-दूसरे की सहायता अपने परिवार की तरह करेंगे। कलयुग में
सतयुग एक हजार वर्ष तक चलेगा। इसका 50% प्रभाव 2 लाख वर्ष तक तथा 30% प्रभाव
एक लाख तीस हजार वर्ष तक रहेगा।
अंत के 95500 (पचानवे हजार पाँच सौ) वर्षों में 95% व्यक्ति कृतघ्नी, मर्यादाहीन,
दुष्ट हो जाऐंगे। कच्चा माँस खाने लगेंगे। आयु बहुत कम यानि 20 वर्ष रह जाएगी। मानव
की लंबाई 2 से 3 फुट तक रह जाएगी। 5 वर्ष की लड़की को बच्चा पैदा होगा। 80% व्यक्ति
15 वर्ष की आयु में मर जाया करेंगे। फिर एकदम पृथ्वी पर बारिश से पानी-पानी हो
जाएगा। जो अच्छे व्यक्ति 5% बचेंगे, शेष कुछ तो कल्कि (निःकलंक) अवतार मार देगा,
कुछ बाढ़ में मर जाऐंगे। बचे हुए व्यक्ति ऊँचे स्थानों पर निवास करेंगे। पृथ्वी पर सौ-सौ
फुट तक पानी हो जाएगा। धीरे-धीरे पानी सूखेगा। पृथ्वी पर पेड़ (वन) उगेंगे। फिर जमीन
उपजाऊ होगी। कलयुग के अंत में धरती का 3 फुट नीचे तक उपजाऊ अंश समाप्त हो
जाएगा। पानी के कारण वह विष पृथ्वी से बाहर पानी के ऊपर आएगा। पृथ्वी फिर से
उपजाऊ होगी और पुनः सत्ययुग की शुरूआत होगी।

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