शाश्त्र अनुसार सत भक्ति
📚️संत रविदास जी की कथा👏 एक पंडित जी गंगा स्नान करने रोज जाते थे, रास्ते मे संत रविदास जी दूकान पड़ती थी। जिसमें वो जूते सिलने का काम करते थे, संत रविदास जी चमार जाती से थे इसलिए पंडित जी उन्हे शुद्र कहते थे। दूर से ही राम राम करके चले जाते, एक दिन पंडित जी की जूती टूट गयी तो सोचा संत गंगा स्नान करने जाते समय रास्ते मे रविदास जी के दुकान के सामने रुके और बोले रविदास हमरी जूती बना दो। टूट गयी हैं। पंडित जी उनके पास नहीं गए। सङक पर ही खड़े रहे। रविदास जी ने कहा पंडित जी बैठिए जब तक मै आपकी जुटी बना देता हूँ, पंडित जी बोले नहीं रविदास मै शुद्र के निकट नहीं आता। तुम्हारे पास आने से मै आपवित्र हो जाऊंगा। तुम मेरी जूती बना कर दे दो। जो मजदूरी हो ले लो। रविदास जी ने कहा ठीक है पंडित जी, संत रविदास जी ने जूती बनाते हुए पंडित जी से पूछा पंडित जी कहा जा रहे हैं आप? पंडित जी बोले मै गंगा स्नान करने जा रहा हूं। तुम कभी समय निकाल कर जाया करो। मानव जीवन मिला है कुछ धर्म करम भी कि...