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Showing posts from May, 2020

पूर्ण परमात्मा कोन है

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कबीर साहब पूर्ण परमात्मा हैं कबीर साहेब चारों युगों में आते हैं सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।। तत्वज्ञान के अभाव से श्रद्धालु शंका व्यक्त करते हैं कि जुलाहे रूप में कबीर जी तो वि. सं. 1455 (सन् 1398) में काशी में आए हैं। वेदों में कविर्देव यही काशी वाला जुलाहा (धाणक) कैसे पूर्ण परमात्मा हो सकता है? इस विषय में दास (सन्त रामपाल दास) की प्रार्थना है कि यही पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं। सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिन्द्र नाम से, द्वापर युग में करूणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कविर्देव (कबीर प्रभु) नाम से प्रकट हुए हैं। इसके अतिरिक्त अन्य रूप धारण करके कभी भी प्रकट होकर अपनी लीला करके अन्तध्र्यान हो जाते हैं। उस समय लीला करने आए परमेश्वर को प्रभु चाहने वाले श्रद्धालु नहीं पहचान सके, क्योंकि सर्व महर्षियों व संत कहलाने वालों ने प्रभु को निराकार बताया है। वास्तव में परमात्मा आकार मे...

मानवता का उत्थान

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मानवता से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। मानव को हमेशा मानव मूल्यों का आदर कर समाज के दीन-हीन लोगों की सेवा करनी चाहिए। सोमवार को आदिवासी महिला उत्थान केन्द्र एवं नेहरु युवा केन्द्र के संयुक्त तत्वाधान में शास्त्री नगर स्थित सांता पब्लिक स्कूल में आयोजित स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जस्टिस जुबेनाईल बोर्ड के सदस्य शंभु सिंह ने उक्त बातें कहीं। छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने कहा कि आज देश के युवाओं को स्वामी जी के आदर्शो को आत्मसात कर उसका प्रयोग देश हित में करने की जरुरत है। उन्होंने छात्रों से अपनी उर्जा देशहित में लगाने की बात कही। विशिष्ट अतिथि प्रो. भूषण महतो ने कहा कि स्वामी जी के बाल अवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि स्वामी जी के पिता वकील थे एवं स्वामी जी को भी पैसा कमाने के लिए वकील बनाना चाहते थे लेकिन इससे इतर स्वामी जी ने अपना घर-बार छोड़कर बेलूर मठ में राम कृष्ण परमहंस को आदर्श गुरु मानकर वहां रहना शुरू किया एवं पूरे देश का भ्रमण कर देश के हालात का जायजा लिया था। कहा कि स्वामी...

सच्चा भगवान कोन है

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 पूर्णब्रह्म (सत्पुरुष )असंख्य ब्रह्मांड जो सतलोक आदि में है तथा ब्रह्मा के 21 ब्रह्मांड ओ तथा परब्रह्मा के सात संत ब्रह्मांड का भी प्रभु (मालिक) है  अर्थात परमेश्वर कबीर देव कुल के मालिक हैं श्री ब्रह्मा जी श्री विष्णु जी तथा श्री शिव जी आदि के चार भुजाएं हैं 16 कलाएं हैं तथा प्रकृति देवी दुर्गा जी की आठ भुजायें हैं तथा 16 कलाएं हैं क्षर पुरुष की हजार भुजाएं हैं तथा 1000 कलाएं हैं तथा 21 ब्रह्मांड ओं का प्रभु है परब्रह्म अक्षर पुरुष की 10000 भुजाएं हैं तथा 10000 कलाएं हैं सात संख ब्रह्मांडो का प्रभु है पूर्णब्रह्मा परम अक्षर पुरुष  की असंख्य भुजाएं तथा असंख्य कलाएं हैं तथा ब्रह्मा के 21 ब्रह्मांड ओं में परब्रह्म के साथ संख ब्रह्मांड ओ सहित असंख्य ब्रमांडो ओं का प्रभु है प्रत्येक प्रभु अपनी भुजाओं को समेट भी सकता है और अपनी भुजाओं को जब चाहे अपनी भुजाओं को प्रकट भी कर सकता है

कैसे होगा कलयुग में सतयुग

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वर्तमान में सन् 1997 से 3000 ईशवी तक पुनः सत्ययुग जैसा वातावरण, आपसी प्रेम का माहौल बनेगा। फिर से फलदार वृक्ष तथा छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे। फैक्ट्रियां धुँआ रहित होंगी। फिर बंद हो जाऐंगी। लोग हाथ से बने कपड़े पहनेंगे। मिट्टी या स्टील के बर्तन प्रयोग करेंगे जो छोटे कारखानों में मानव चालित यंत्रों से तैयार होंगे जो मानव संचालित अहरण की तरह चलेंगे। पशुधन बढ़ेगा। सब मानव मिलकर पूरी पृथ्वी को उपजाऊ बनाने ें एकजुट होकर कार्य करेंगे। कोई धनी व्यक्ति अहंकारी नहीं होगा। वह अधिक धन दान में देगा। जो अधिक धन संग्रह करेगा, उसे मूर्ख कहा जाएगा। उसको ज्ञान समझाकर सामान्य जीवन जीने की प्रेरणा दी जाएगी जिसको वह स्वीकार करेगा। सामान्य जीवन जीने वाले और भक्ति, दान धर्म करने वालों की प्रशंसा हुआ करेगी। पश्चिमी देशों (अमेरिका, इंग्लैंड आदि-आदि) वाली सभ्यता समाप्त हो जाएगी। स्त्राी-पुरूष पूरे वस्त्रा पहना करेंगे। सुखमय जीवन जीएंगे। एक-दूसरे की सहायता अपने परिवार की तरह करेंगे। कलयुग में सतयुग एक हजार वर्ष तक चलेगा। इसका 50% प्रभाव 2 लाख वर्ष तक तथा 30% प्रभाव एक लाख तीस हजार वर्ष तक रहेगा। अंत के 95500 (पचान...

कोनसे राम की भक्ति करनी चाहिए

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चौथा राम सबसे न्यारा है वही सृष्टि का कर्ता-धर्ता है Sant Kabir   एक राम दशरथ का बेटा , एक राम घट-घट में बैठा एक राम का सकल पसारा , एक राम सबहूँ ते न्यारा अर्थात: कबीर साहब के कथनानुसार राम चार प्रकार के हैं , उन्होंने फ़रमाया है :- [ एक राम] तो राजा दशरथ के पुत्र थे जिन्होंने यहाँ राज किया . वो एक आदर्श पुत्र , आदर्श पति , आदर्श भाई तथा आदर्श राजा थे . जब भी हम अपने मुल्क की बेहतरी की दुआ करते हैं तो यही कहते हैं कि यहाँ राम राज्य हो जाए. [ दूसरा वो राम है ,] जो हमारे घट – घट में बैठा है और वो है हमारा मन . उसका`काम है कि वो हमें परमार्थ के रास्ते में तरक्की न करने दे , यद्यपि हमारा मन भी ब्रह्म का अंश है , ब्रह्म का स्रोत है परन्तु वह अपने स्रोत को भूल चूका है और संत हमें समझाते हैं कि ” मन बैरी को मीत कर ” [ तीसरा वो राम है] जिसका ये सारा पसारा है इसमें माया भी है , काम – क्रोध – लोभ – मोह – अहंकार भी है बाकि भी हर तरह की कशिश है , हमें इनसे बचने का प्रयास करना है . [ चौथा राम] सबसे न्यारा है , सबसे ऊंचा है ,सबसे बड़ी ताकत है , वही इस सृष्टि का कर्ता-धर्ता है , हमारे जीवन का लक...
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👇🏿👇🏿👇🏿👇🏿👇🏿👇🏿👇🏿 *कैसे मिलेगा भगवान*                जीव मानव शरीर के ह्रदय कमल में रहता है। मानव शरीर में त्रिकुटि से पहले पाँच कमल बने हैं जो रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ पेट की ओर बने हैं। इन कमलों में क्रमशः नीचे से :- 👉🏻 *1. मूल कमल =* इसमें गणेश जी का निवास है। चार पंखुड़ी का कमल (चक्र) है। 👉🏻 *2. स्वाद कमल =* इसमें सावित्री तथा ब्रम्हाजी का निवास है। यह छ: पंखुड़ी का कमल (चक्र) है। 👉🏻 *3. नाभि कमल =* इसमें लक्ष्मी तथा विष्णु जी का निवास है। यह आठ पंखुड़ी का कमल (चक्र) है।  👉🏻 *4. ह्रदय कमल =* इसमें पार्वती तथा शंकर जी का निवास है। यह बारा पंखुड़ी का कमल (चक्र) है।  👉🏻 *5. कण्ठ कमल =* इसमें दुर्गाजी का निवास है। यह सोलह पंखुड़ी का कमल (चक्र) है।                 सर्व प्रथम हमने इन कमलों के देवताओं से ऋण-मुक्त होना है। इनके नाम मन्त्रों की साधना अर्थात मजदूरी करनी है जिससे ये देवता हमें आगे जाने देंगे। ह्रदय कमल से जीव ...