प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, माँस खाना नहीं कहा है।
परमात्मा कबीर साहेब पाप विनाशक हैं यजुर्वेद अध्याय 8 मन्त्र 13 में कहा गया है कि परमात्मा पाप नष्ट कर सकता है। संत रामपाल जी महाराज जी से उपदेश लेने व मर्यादा में रहने वाले भक्त के पाप नष्ट हो जाते हैं। परमात्मा कबीर साहेब पाप विनाशक हैं यजु
सन्तो की शिक्षा www.jagatgururampalji.org https://youtu.be/MgyxJlafXns वीडियो को देखने के लिए लिंक को किल्क करे दुख भरे जीवन को सुखमय बनाइए पढ़िए जीने की राह पुस्तक बिल्कुल निशुल्क मंगाने के लिए इस वाट्सप नंबर 7496801825 पर हमें आपका पूरा नाम पता व नम्बर भेजें अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर देख सकते है www.jagatgururampalji.org एक गांव का यक्ति पहली बार श्री नानक देव जी के पास गया उसने देखा कि सन्त जी मायूस अवस्था मे एकांत में बैठे थे उस आदमी ने सत नाम वाहे गुरु बोला श्री नानक जी ने भी उत्तर दिया भोजन करवाया ज्ञान विचार सुनाए वह यक्ति चलागया एक दिन फिर वही यक्ति आया और बोला महाराज जी आप कभी खुश दिखाई नही देते क्या कारण है सन्त नानक जी ने कहा कि है भाई इस मृत्युलोक में सब नाशवान है पता नही किसकी जाने की बारी कब आजा ये इसलिए जिनके सिर पे मोत मंडरा रही हाउस व्यक्ति को नाचना गाना हँसी मजाक कैसे अच्छा लगेगा मूर्ख या नशे वाला व्यक्ति ही इस लोक में खुसी मनाता है जैसे एक व्यक्ति की पत्नी को विवाह के दस वर्ष पश्चात पुत्र हुआ उसके पैदा ...
गीता अध्याय 13 श्लोक 11 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि अध्यात्म ज्ञान में रूचि रखकर तत्व ज्ञान के लिए सद्ग्रन्थों को देखना तत्वज्ञान है, वह ज्ञान है तथा तत्वज्ञान की अपेक्षा कथा कहानियाँ सुनाना, सुनना, शास्त्राविधि विरूद्ध भक्ति करना यह सब अज्ञान है। तत्वज्ञान के लिए परमात्मा को जानना ही ज्ञान है। गीता अध्याय 13 श्लोक 12 में गीता ज्ञान दाता ने अपने से “परम ब्रह्म” का ज्ञान कराया है, जो परमात्मा (ज्ञेयम्) जानने योग्य है, जिसको जानकर (अमृतम् अश्नुते) अमरत्व प्राप्त होता है अर्थात् पूर्ण मोक्ष का अमृत जैसा आनन्द भोगने को मिलता है। उसको भली-भाँति कहूँगा। (तत्) वह दूसरा (ब्रह्म) परमात्मा न तो सत् कहा जाता है अर्थात् गीता ज्ञान दाता ने अध्याय 4 श्लोक 32, 34 में कहा है कि जो तत्वज्ञान है, उसमें परमात्मा का पूर्ण ज्ञान है, वह तत्वज्ञान परमात्मा अपने मुख कमल से स्वयं उच्चारण करके बोलता है। उस तत्वज्ञान को तत्वदर्शी सन्त जानते हैं, उनको दण्डवत् प्रणाम करने से, नम्रतापूर्वक प्रश्न करने से वे परमात्म तत्व को भली-भाँति जानने वाले तत्वदर्शी सन्त तुझे तत्वज्ञान का उपदेश करेंगे। इससे सिद्ध हुआ कि गी...
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